देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने आज शाम को अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया, जबकि आज ही संसद के मानसून सत्र का पहला दिन था और वे सुबह तक पूरी तरह सक्रिय रूप से राज्यसभा की कार्यवाही में मौजूद थे। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।
धनखड़ ने राष्ट्रपति को भेजे अपने त्यागपत्र में कहा कि वे चिकित्सकीय सलाह और स्वास्थ्य कारणों के चलते पद छोड़ रहे हैं। उन्होंने लिखा—
“स्वास्थ्य की प्राथमिकता और चिकित्सकीय सलाह का पालन करते हुए मैं भारत के उपराष्ट्रपति पद से तत्काल प्रभाव से त्यागपत्र दे रहा हूं।”
2022 में बने थे उपराष्ट्रपति
धनखड़ 6 अगस्त 2022 को देश के 14वें उपराष्ट्रपति बने थे। उन्होंने विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को हराकर यह पद संभाला था। उन्हें 528 वोट मिले थे जबकि अल्वा को 182 वोट।
साधारण किसान से उपराष्ट्रपति तक
राजस्थान के झुंझुनू जिले में 1951 में जन्मे धनखड़ ने एक साधारण किसान परिवार से निकलकर बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं। सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़, फिर राजस्थान यूनिवर्सिटी से LLB और उसके बाद जयपुर में वकालत से उनका सफर शुरू हुआ।
बंगाल के राज्यपाल और पूर्व केंद्रीय मंत्री
2019 में धनखड़ को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। इससे पहले वे 1989 में झुंझुनू से सांसद बने और वी.पी. सिंह व चंद्रशेखर सरकारों में केंद्रीय मंत्री भी रहे।
अब क्या होगा आगे?
इस तरह अचानक उपराष्ट्रपति का इस्तीफा देना न केवल संवैधानिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह ऐसे समय पर हुआ है जब संसद सत्र शुरू हुआ है। अब अगले उपराष्ट्रपति के लिए नई नियुक्ति प्रक्रिया जल्द ही शुरू हो सकती है।
यह खबर जितनी चौंकाने वाली है, उतनी ही गंभीर भी — देश के उच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का यूं अचानक जाना कई सवाल छोड़ता है।